महिला नसबंदी के फायदे और नुकसान?HealthPlanet

Posted on Fri 29th Apr 2022 : 01:56

क्या होता है महिला नसबंदी?
महिला नसबंदी अनचाहे गर्भ को रोकने का सबसे अच्छा उपाय माना जाता है। इस प्रक्रिया में छोटा सा ऑपरेशन करवाना पड़ता है। इसमें मरीज को एनेस्थेटिक देकर ऑपरेशन किया जाता है। शल्य क्रिया में महिला के फैलोपिन ट्यूब को या तो अवरूद्ध किया जाता है या काट दिया जाता है। दरअसल यही ट्यूब अंडे को अंडाशय से गर्भाशय तक ले जाने का कार्य करती है।

99% तक असरदार है ये तकनीक:
बता दें कि अधिकतर मामलों में महिलाओं की नसबंदी का ऑपरेशन सफल होता है। नसबंदी के बाद 200 में से इक्के दुक्के मामलों में ही महिलाओं के फिर से गर्भवती होने की आशंका रहती है। बता दें कि ये ऑपरेशन सीजेरियन या मिनी लैपरोटोमी तकनीक द्वारा की जाती है। इसके अलावा विकसित देशों में लैप्रोस्कोपिक नसबंदी और हिस्टोरोस्कोपिक ट्यूबल ओक्लुजन तकनीक मशहूर है।

महिला नसबंदी के फायदे
1 नसबंदी उन महिलाओं के लिए स्थायी उपाय है, जो अनचाहा गर्भ रोकना चाहती हैं।
2 नसबंदी की सफलता की दर काफी अधिक है।
3 नसबंदी में गर्भनिरोधक गोलियां, इंजेक्शन, इम्प्लांट्स या इंट्रायूटेरियन उपकरण की तरह साइड इफैक्ट नहीं होते।
4 महिला नसबंदी से अंडाशय के कैंसर की संभावना भी काफी कम रहती है।

महिला नसबंदी के नुकसान
1 ये एक स्थायी प्रक्रिया है, जिसे बदलना बेहद मुश्किल है।
2 अगर ऑपरेशन असफल रहा तो आप गर्भवती भी हो सकती हैं।
3 ऑपरेशन फैल जाने की स्थिति में गर्भ बाहर ठहरने की आशंका रहती है, इसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी भी कहा जाता है।
4 नसबंदी के ऑपरेशन में चीरे वाली जगह पर इंफेक्शन की समस्या हो सकती है। यही नहीं बल्कि एनेस्थेटिक से पेट में परेशानी, गैस बनना और दर्द होने जैसी समस्या भी हो सकती है।

नसबंदी के बाद जरूरी हैं ये सावधानियां..

1 नसबंदी कराने के बाद फॉलोअप के लिए डॉक्टर के पास जाना बेहद जरूरी है। साथ ही डॉक्टर द्वारा दी गई दवाई और एंटी बायोटिक्स का कोर्स पूरा करना भी बेहद जरूरी है। अन्यथा इंफेक्शन हो सकता है।
2 अगर ऑपरेशन के बाद बुखार, लगातार पेट दर्द, चीरे से खून या पीप आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें।
3 ऑपरेशन के 7 दिनों तक शारीरिक संबंध बनाने से बचें।
4 अगर ऑपरेशन के बाद पीरियड्स स्किप होता है या लेट होता है तो सर्जन से संपर्क जरूर करें।

महिला नसबंदी कब और कैसे चुने?

वैसे तो महिलाएं नसबंदी तब करवाती हैं, जब वो अपने परिवार में इच्छानुसार बच्चे पैदा कर लेती हैं। 40 या 45 साल से अधिक उम्र की महिलाएं प्रेग्नेंसी से बचने के लिए भी नसबंदी का सहारा लेती हैं।
बता दें कि नसबंदी का चुनाव तभी करना चाहिए, जब शारीरिक के साथ साथ मानसिक रूप से भी इसके लिए तैयार हों। क्योंकि नसबंदी एक स्थायी प्रक्रिया है।

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